संत-समाज या कुछ और?

चेतावनीः यह पोस्ट सदियों से जड़े जमाई धारणाओं पर कटाक्ष करती है। भावनाओं को ज्ञान का कवच पहना कर रखें। किसी तरह से भावनाओं के आह्त होने पर लेखक की ज़िम्मेदारी नहीं होगी। फिर भी पोस्ट पर टिप्पणी करनी हो तो कमेंट बाक्स में लिख कर करें। धन्यवाद। आप आज […]

उम्र (निष्कर्ष)

नोटः- यह कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है। समानताएँ महसूस होंगी पर ये कहानी काल्पनिक है। उम्र (प्रारम्भ) को पहले भाग को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। अब तकः सोनम एक बहुत ही सीधी लड़की थी, पर जब उसके पिता ने उसको शादी में ढकेलने की कोशिश की तोअंततः […]

सौदा

गाड़ी में सिर झुकाए बैठी लतीफ़ा को नहीं पता था कि उसके साथ क्या होने वाला है… पर उसे अंदाज़ा हो गया था कि उसका सौदा हो चुका है। लतीफ़ा कोई आम लड़की नहीं थी। वो हिम्मती और आज़ादी के तराने को अपने ज़ुबान कर गुनगुनाने वाली लड़की थी। पर […]

दूसरा रास्ता…

दस साल बाद आस्था उसी स्टेशन पर खड़ी थी जहाँ से वो कभी अपनी बहन के साथ घऱ को जाया करती थी। आस्था के साथ चार बच्चे थे और आँखों पर काला चश्मा। वो चश्में के आँखों पर होते हुए भी अपने गुज़रे कल को साफ़-साफ देख सकती थी। दस […]

तो आपका क्या जवाब है?

फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किस प्रकार के प्रेमी हो। आपको अपने हर विरोधी का जवाब इस पोस्ट से मिल जाएगा। और अगर न मिले तो भी आपको पता है कि बन्नो की डायरी इस तरह आपको हारने नहीं देगी।

धृतराष्ट्र न बनो भारत…

चेतावनीः– मोटी बुद्धि और पतली चमड़ी (Thick Skull And Thin Skin) के लोग इस पोस्ट से दूर रहे। नेताओं के चश्मे से दुनिया देखने वालों नेता का चश्मा उतार लेना चाहिये। इस पोस्ट का उद्देश्य किसी समुदाय, जाति या व्यक्ति को ठेस पहुँचाना नहीं है। पर फिर भी अगर किसी […]

और झंडू ग़रीब हो गया…

झंडू हमारा बड़ा ही शानदार आदमी था। पिछवाड़े पर एक लाख की गाड़ी, आँखों पे काला चश्मा, हाथ में आई-फून और पाकेट में तीन-तीन क्रेडिट कार्ड। झंडू को लोग प्यार (और जलन के मारे) सेठ कहते थे। सब मस्त था उसके जीवन में। घऱ में दो प्यार करने वाले माँ-बाप। अकेली औलाद था तो कोई भी नहीं था कंपटीशन में। पढ़ा-लिखा गबरू लौंड़ा।
पर झंडू को न मालूम था कि मोदी उसके मस्त जीवन की लगाने वाले थे।

घपलू का आरक्षण-भाग २

घपलू की मस्त चल रही थी। अब घपलू घपलू नहीं रहा था, बाबा घपलू प्रसाद हो गया था। घपलू के पिता झोलू जब इस दुनिया से टरकने वाले थे तो उन्होंने ने घपलू को बुलाया और कहा, बेटा मेरे 2100 करोड़ कहाँ हैं। घपलू क्या कहता? पिछली सरकार में रहते […]

मेरा मंदिर महान, भाड़ में जाए इंसान।

भारतवासियों में सदियों से पैठ किये हुए व्यक्तिगत भ्रष्टाचार पर हमारा एक तीक्ष्ण प्रहार। कैसे दूसरे के दाग गिनाने में अपने आपको भूल जाते है। चेतावनी- ये पोस्ट समाज की सच्चाई को दर्शाता है। कड़वा हो सकता है।

क्या आप ने लड़के से ये बातें की…

क्या आपने कभी अपने लड़के से कहा किः- “बेटा, किसी लड़की का हँसना-बोलना उस पे छींटाकशी, उसे छेड़ने, उसे परेशान करने का न्योता नहीं।” या फिर “बेटा, किसी लड़की का शरीर न तुम्हारी जायदाद है न ही उसके साथ सोने से तुम्हारी कोई इज़्ज़त बनती है।” या फिर “बेटा, किसी लड़की के साथ […]