महाराष्ट्र के सियासी संग्राम में क्या शरद पवार ने लगा लिये एक तीर से कई निशाने?

फ़ोटो सोर्स- स्वयं शरद पवार, पर theprint.in से उठाई है। Sorry theprint. I have no money to pay to you. Sorry.

दिन तारीख़ किसे याद रहती है? पर ये घटना ऐसी है जिसे तारीख़ के साथ याद करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।आज 26, नवम्बर, 2019 को उच्चतम न्यायालय ने उस सियासी संग्राम की तंदूरी कबाब में क़ानूनी मसाला डाल दिया है जिसके चलते ज़ायक़ा और मज़ेदार हो चला है। आज उच्चतम न्यायालय ने तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए महाराष्ट्र के “कोश्यारी जी की होशियारी” को किनारे कर दिया और आदेश दिया कि-

  • सभा बुलाइये। फ़्लोर टेस्ट कराइये।
  • प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट कराइये।
  • दूसरे दिन की शाम 5 बजे तक कराइये।
  • खुले मतदान से फ़्लोर टेस्ट कराइये।

लेख लिखने तक प्रोटम स्पीकर को शपथ दिलाई जा चुकी है। तमाम राजनीतिक शक्तियाँ उस रस्सी को हथियाना चाहती हैं जिससे वो जनता नामक गाय को ले जाएँ और खूँटे से बाँध कर पाँच साल दुहें। आपको याद दिला दें कि PMC Scam का दंश जनता अब भी झेल रही है… भले ही चुनाव के नशे में मीडिया ने इसे भुला दिया हो।

भाजपा को महाराष्ट्र चाहिये क्योंकि महाराष्ट्र से सबसे ज़्यादा पैसा आता है। महाराष्ट्र में ही दो ख़ूँख़ार पिशाचों की जान बसी है, कथित तौर पे। वैसे सुनने में आ रहा है कि कथित आतंकी प्रग्या को सुरक्षा परिषद में जगह मिली है। हो भी क्यों न? वो सुरक्षा में सेंध के सारे तरीक़े जानती हैं, कथित तौर पर।

वैसे भक्तों के पापा जी के लंगोटिया यार की भी जान उसी महाराष्ट्र में बसती है। प्यार जो करते हैं वो, उस धन को जो महाराष्ट्र से आता है, कथित तौर पर। कौन पैसे से प्यार नहीं करता? डरते जो हैं वो उस केस से जो… महाराष्ट्र से आता है। सबसे अदालत के फ़ैसले से परिणाम जो भी आए पर इस पूरे घटनाक्रम से एक बात सब कहने लगे हैः सब शरद पवार का किया धरा है।

अब कोई शरद पवार को चाचा चौधरी कह रहा है कोई बड़का चाणक्य। पर ऐसा हो भी क्यों न? जिस भाजपा ने साम, दाम, दंड, भेद से सत्ता को हथियाया उस भाजपा की दाल नहीं गली।

तो क्या-क्या हुआ पिछले कुछ दिन में? महाराष्ट्र ने चुनाव को देखा, सीटों का खेल भी देखा, भाजपा के कथित नागपुरिया गुर्गों को सरकार बनाते भी देखा। पर सरकार बनाने की इसी जल्दी में भाजपा ने अजित पवार को रातोंरात उपमुख्य मंत्री बना लिया। जल्दी ही अजीत पवार के दल बदलने के पीछे शरद पवार का हाथ बताने लगा। सब इस ड्रामे में मास्टरमाइंड को शरलॉक होम्स की तरह ढूँढ रहे थे।

आज अजित पवार इस्तीफ़ा दे चुके हैं, भाजपा की सरकार गिर चुकी है, महाराष्ट्र में। पर इस पूरे घटनाक्रम में जनता ने क्या-क्या देखा।

भाजपा ने जिस अजीत पवार को चुनावी रैलियों में जी खोल के गालियाँ दी थी, जेल की चक्की पीसने का सपना दिखाया था उसको उसने उपमुख्यमंत्री बनते ही क्लीन चिट दे दी। और अब अजीत पवार वापस भाजपा के बाहर हैं। मतलब भाजपा का “खाया-पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आना” हो गया।

आप सोच रहे होंगे कि इस सब में शरद पवार की क्या भूमिका थी?

यकीनन कुछ नहीं कहा जा सकता कि उनकी क्या भूमिका रही होगी अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने में। इस देश में किसी अपराधी की तो भूमिका किसी अपराध में तय की जा सकती है पर सत्ता के खेल के पीछे के पपेट-मास्टर की भूमिका तय करना किसी के बस की बात नहीं। शरद पवार जी ने क्या किया क्यों किया आप उस पर दिमाग़ न लगाये।

पर सोचिये कि इस पूरे घटनाक्रम ने क्या कर डाला-

  • सीधे तौर पर इस घटनाक्रम ने जनता को बता दिया कि कौन सत्ता के लिये बेशर्मी का नंगा नाच कर रहा है।
  • खुले भ्रष्टाचार के नंगे खेल को भी जनता के सामने ला दिया।
  • अजित पवार को हज़ारों करोड़ के केस से क्लीन चिट दिला दी। अब भाजपा नहीं कह पायेगी कि अजीत पवार भ्रष्टाचारी है क्योंकि क्लीन चिट तो आप की ही सी०बी०आई० ने दिया। कथित तौर पर भाजपा की कथपुतली बनी सी०बी०आई० किस मुँह से कोर्ट में अजीत पवार को घसीटेगी? क्लीन चिट तो उसी ने दी है।
  • अजित पवार वापस सत्ता में काग़ज़ पर पाक साफ़ छवि के साथ बैठेंगे। कौन सी०बी०आई० की क्लीन चिट पर सवाल उठायेगा।
  • भाजपा अब अगर सत्ता में जोड़ तोड़ कर के आ भी गई तो जनता को उसकी थू-थू के अलावा कुछ नहीं मिल पायेगा।
  • जिस खेल को भाजपा कर्नाटक में कर के सत्ता में आ गई वो अब यहाँ किया तो जनता का भारी विरोध मिलेगा।
  • राज्यपाल और राष्ट्रपति की भूमिका इस भाजपा की सरकार में क्या है ये भी साफ़ हो गया। आने वाले समय में राष्ट्रपति के भाषणों की टी०आर०पी० कम होने की पूरी संभावना है।

एक भी भ्रष्टाचारी नहीं छोड़ा जाएगा

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सबको सरकार में जगह दी जाएगी।

तड़ीपार जी महाराज।

अगर ये खेल शरद पवार का है तो ये खेल शानदार था। भाजपा को मात दी जा सकती है ये शरद पवार ने जगज़ाहिर कर दिया, अगर ये सब शरद पवार का किया धरा है। साथ ही कितने छुपे भेड़िये सामने ला दिये ये भी तो देखिये।

अब आती है बात आप की। तो आप सिर्फ़ इंतिज़ार कीजिये। ये सारा खेल एक बार ही खेला जा सकता है, बार बार नहीं। आप फिर से वोटिंग बूथ में जाइयेगा और जरा विचार कीजियेगा कि कौन आपका है। इंतिज़ार कीजिये और देखियेगा कि क्या महाराष्ट्र में सत्ता कभी PMC के भुक्तभोगियों को न्याय दिलायेगी। क्या सत्ता परिवर्तन किसानों की आत्महत्या रोक सकेगा? क्या पढ़ाई सस्ती हो सकेगी जैसी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में है? आप बस इंतिजार कीजिये, और याद रखिये कि भाजपा को सबक सिखाने को शरद पवार हमेशा नहीं आयेगा। कोई अमर नहीं। और इस सबक सिखाने से मिला सबक क्या आप याद भी रख पायेंगे? क्या आप अपनी चुनी हुई सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर पायेंगे।

ये देश एक भयानक और क्रूर दौर से गुजर रहा है। विदेश से आये पैसे को चुनावी बांड बना के भाजपा ने अपने सत्ता में बने रहने का जुगाड़ तो कर लिया पर क्या किसी भी अन्य पार्टी की सरकार ने आपके लिये कोई काम किया। चलो दिल्ली में तो केजरीवाल ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम कर दिया और तारीफ़ भी बटोर ली, पर क्या अन्य राज्यों की सरकार ने कुछ किया? ये आपको सोचना है। नज़र आपको रखनी है, क्योंकि जिस मीडिया को आपने अपना दोस्त समझ रखा है वो सिर्फ़ सत्ता का भोंपू बन जाना चाहती है।


डिस्क्लेमर- पोस्ट पूरा पढ़ने के लिये धन्यवाद। वेबसाइट लेख की ज़िम्मेदारी नहीं लेती। अगर लेने लगेगी तो फिर इंसान का क्या मोल रह जाएगा। वेबसाइट स्वयं तो लेख लिख नहीं रही। अगर देश बचाना है तो बोलना ही पड़ेगा। जब अपराधी नहीं डरता तो शोर मचाने वाले को भी नहीं डरना चाहिये। ज़्यादा से ज़्यादा क्या कर लेगा? मार ही डालेगा न? लोकतंत्र की हत्या के इस दौर में ज़िन्दा रह भी गए तो कितने दिन जी पाएँगे?

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