बंध गई बिल्ली के गले में घंटी- राम मंदिर पर आए आदेश का विश्लेषण

भोला इलाहाबादी की कलम से। बचपन में पंचतंत्र की कहानी पढ़ते थे तो बहुत बार बिल्ली के गले में घंटी की कहानी को पढ़ा। मज़ा आता था सुन कर। अब वो कहानी भूली-भूली सी हो गई है। भविष्य में शायद ही किसी बच्चे को यह कहानी सुनने को मिले। न […]

आजा आजा, देख यहाँ कैसा किसका हाल है…

LYRICS AVAILABLE FOR LICENCE TO RAPPERS… Disclaimer:- पेज़ के अंत पर है। पहले कविता तो पढ़ लो। वैसे भी शेक्सपियर ने कहा हैः- “डिस्क्लेमर में क्या रखा है? BC” आजा आजा, देख यहाँ कैसा किसका हाल है, सबकी आँखें बंद, ये सब सत्ता का कमाल है। मुँह में बाँधी पट्टी […]

अभी दो ही दिन तो बीतें थे…

अभी दो दिन ही तो हुए थे… मन रही थी ख़ुशी उस रोज़, हैरां था मैं कि अभी दो दिन ही हुए थे। भूला नहीं था शाम को उस दिन, चीख़ों से गूंजा था गाँव, भूखे पेट भी थिरकते थे जो कल, अब न थिरकेंगे वो पाँव। कल गूँजी थी […]

स्त्री हो तुम…

शायद आप इसे मेरा Unprofessionalism कहें या कुछ और, पर सच तो यही है कि मैं ने अपने जीवन में हिंदी साहित्य बहुत कम पढ़ा। शायद यही कारण है कि मुझे कविता के कवि के बारे में नहीं पता। कवि को मेरा सम्मान और क्षमा कि मैं आपको नाम यहाँ […]

वो काली रात… (Last Episode)

वो काली रात-1, वो काली रात-2, वो काली रात-3, वो काली रात-4 मैं यक़ीन नहीं कर पा रहा था उस सीसे पर। उस सीसे में पुतला ही था। कपड़े का बना पुतला ही था सीसे में। “ये कैसे हो सकता है?”—मैं ने पूछा। मुझे अब भी लग रहा था कि […]

वो काली रात… (Episode 4)

अंत क़रीब था… पर रहस्य ने उसे और रोमांचक कर दिया। बहुत दिलचस्प होने वाली है ये कहानी।

वो काली रात… (Episode-2)

(continued…) उस घुप्प अंधेरे कमरे में बंद मैं सिया के बारे में सोच रहा था… याद कर रहा था उस दिन को जब मुझे होश आया था। वो सिया ने मुझे बनाया था। वही थी जिसने मुझ में जान फूँकी। मैं नहीं जानता कि ऐसा उसने जान-बूझ कर किया या […]

वो काली रात…

पढ़ाये मेरी आपके दिल में डर और भावनाएँ पैदा करने वाली मेरी लघु-कथा (डरावनी)। शुभ रात्रि।

उम्र (प्रारम्भ)

आज की कहानी है सोनम की। एक ऐसी लड़की जिसने सब कुछ सहने के बाद भी हार नहीं मानी और अंततः सम्मान के साथ अपने अधिकारों को पाया। सोनम की हिम्मत ऐसी थी कि उसकी कहानी आपको सुनाते हुए लेखक को फ़क्र महसूस हो रहा है। (नोटः-यह कहानी सच्ची घटना […]

उम्र (निष्कर्ष)

नोटः- यह कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है। समानताएँ महसूस होंगी पर ये कहानी काल्पनिक है। उम्र (प्रारम्भ) को पहले भाग को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। अब तकः सोनम एक बहुत ही सीधी लड़की थी, पर जब उसके पिता ने उसको शादी में ढकेलने की कोशिश की तोअंततः […]

सौदा

गाड़ी में सिर झुकाए बैठी लतीफ़ा को नहीं पता था कि उसके साथ क्या होने वाला है… पर उसे अंदाज़ा हो गया था कि उसका सौदा हो चुका है। लतीफ़ा कोई आम लड़की नहीं थी। वो हिम्मती और आज़ादी के तराने को अपने ज़ुबान कर गुनगुनाने वाली लड़की थी। पर […]

दूसरा रास्ता…

दस साल बाद आस्था उसी स्टेशन पर खड़ी थी जहाँ से वो कभी अपनी बहन के साथ घऱ को जाया करती थी। आस्था के साथ चार बच्चे थे और आँखों पर काला चश्मा। वो चश्में के आँखों पर होते हुए भी अपने गुज़रे कल को साफ़-साफ देख सकती थी। दस […]

तो आपका क्या जवाब है?

फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किस प्रकार के प्रेमी हो। आपको अपने हर विरोधी का जवाब इस पोस्ट से मिल जाएगा। और अगर न मिले तो भी आपको पता है कि बन्नो की डायरी इस तरह आपको हारने नहीं देगी।

धृतराष्ट्र न बनो भारत…

चेतावनीः– मोटी बुद्धि और पतली चमड़ी (Thick Skull And Thin Skin) के लोग इस पोस्ट से दूर रहे। नेताओं के चश्मे से दुनिया देखने वालों नेता का चश्मा उतार लेना चाहिये। इस पोस्ट का उद्देश्य किसी समुदाय, जाति या व्यक्ति को ठेस पहुँचाना नहीं है। पर फिर भी अगर किसी […]

और झंडू ग़रीब हो गया…

झंडू हमारा बड़ा ही शानदार आदमी था। पिछवाड़े पर एक लाख की गाड़ी, आँखों पे काला चश्मा, हाथ में आई-फून और पाकेट में तीन-तीन क्रेडिट कार्ड। झंडू को लोग प्यार (और जलन के मारे) सेठ कहते थे। सब मस्त था उसके जीवन में। घऱ में दो प्यार करने वाले माँ-बाप। अकेली औलाद था तो कोई भी नहीं था कंपटीशन में। पढ़ा-लिखा गबरू लौंड़ा।
पर झंडू को न मालूम था कि मोदी उसके मस्त जीवन की लगाने वाले थे।

ये कहाँ आ गये हम?

आज जब मैं Facebook को खोल के देखा तो मुझे पता चला कि हम कितने आगे बढ़ गये हैं। चुनाव भले ख़त्म हो चुके हों पर भगवा आई0टी0 सेल नहीं। अब वैसे आई0टी0 सेल की ज़रूरत ही नहीं है। अब उनका यह काम देश के वह युवक युवतियाँ करेंगे जिनमें […]

दिल ही तो है…

आज का पोस्ट कोई कहानी नहीं। आज मुझे ग़ालिब की महान शायरी को आपके सामने पेश करते हुए ख़ुशी महसूस हो रहा है। ग़ालिब ताउम्र फ़क़ीरों की तरह जिये और फ़क़ीर की तरह ही अलविदा कह गए। आज उनकी इस शायरी को पढ़ कर हम ग़ालिब की बेफ़िक्री और मस्तमौला […]