…तो आप में भी छुपा है एक बलात्कारी

“कभी सोचा है कि बलात्कार का सबसे मुख्य प्रेरक क्या है? नहीं जानेंगे क्योंकि तब तकलीफ़ होगी कि हम में भी बलात्कारी होने के सब गुण हैं। मर्दों का तो ठीक महिलाओं में भी बलात्कारी होने के तमाम गुण मौजूद हैं। आपको आश्चर्य होता होगा कि महिला कैसे बलात्कार कर […]

बंध गई बिल्ली के गले में घंटी- राम मंदिर पर आए आदेश का विश्लेषण

भोला इलाहाबादी की कलम से। बचपन में पंचतंत्र की कहानी पढ़ते थे तो बहुत बार बिल्ली के गले में घंटी की कहानी को पढ़ा। मज़ा आता था सुन कर। अब वो कहानी भूली-भूली सी हो गई है। भविष्य में शायद ही किसी बच्चे को यह कहानी सुनने को मिले। न […]

आजा आजा, देख यहाँ कैसा किसका हाल है…

LYRICS AVAILABLE FOR LICENCE TO RAPPERS… Disclaimer:- पेज़ के अंत पर है। पहले कविता तो पढ़ लो। वैसे भी शेक्सपियर ने कहा हैः- “डिस्क्लेमर में क्या रखा है? BC” आजा आजा, देख यहाँ कैसा किसका हाल है, सबकी आँखें बंद, ये सब सत्ता का कमाल है। मुँह में बाँधी पट्टी […]

अभी दो ही दिन तो बीतें थे…

अभी दो दिन ही तो हुए थे… मन रही थी ख़ुशी उस रोज़, हैरां था मैं कि अभी दो दिन ही हुए थे। भूला नहीं था शाम को उस दिन, चीख़ों से गूंजा था गाँव, भूखे पेट भी थिरकते थे जो कल, अब न थिरकेंगे वो पाँव। कल गूँजी थी […]

ये कहाँ आ गये हम?

आज जब मैं Facebook को खोल के देखा तो मुझे पता चला कि हम कितने आगे बढ़ गये हैं। चुनाव भले ख़त्म हो चुके हों पर भगवा आई0टी0 सेल नहीं। अब वैसे आई0टी0 सेल की ज़रूरत ही नहीं है। अब उनका यह काम देश के वह युवक युवतियाँ करेंगे जिनमें […]

दिल ही तो है…

आज का पोस्ट कोई कहानी नहीं। आज मुझे ग़ालिब की महान शायरी को आपके सामने पेश करते हुए ख़ुशी महसूस हो रहा है। ग़ालिब ताउम्र फ़क़ीरों की तरह जिये और फ़क़ीर की तरह ही अलविदा कह गए। आज उनकी इस शायरी को पढ़ कर हम ग़ालिब की बेफ़िक्री और मस्तमौला […]

स्त्री हो तुम…

शायद आप इसे मेरा Unprofessionalism कहें या कुछ और, पर सच तो यही है कि मैं ने अपने जीवन में हिंदी साहित्य बहुत कम पढ़ा। शायद यही कारण है कि मुझे कविता के कवि के बारे में नहीं पता। कवि को मेरा सम्मान और क्षमा कि मैं आपको नाम यहाँ […]